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आपने मालिक के इशारों पर चंद मिनट पहले घोड़े ने किया डांस ! फिर पालतू घोड़े को इंजेक्शन देकर सुला दिया गहरी नींद

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मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की चिचोली नगर परिषद में एक घोड़े को मौत का मर्सी किंलिग प्रक्रिया के तहत इंजेक्शन देकर दफना दिया गया। चिचोली का यह पालतू घोड़ा एक शानदार डांसर था जो चलता भी था तो ऐसा लगता था मानों डांस कर रहा हो, उसे डॉक्टरों की टीम ने इंजेक्शन लगाकर सदा के लिए मौत की नींद सुला दिया। डांसर जिसने मौत के चंद मिनट पहले भी मालिक के इशारे पर डांस किया एक लाइलाज बीमारी ग्लैडर्स से ग्रस्त था।

चिचोली विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. केसी तंवर के अनुसार दिलीप राठौर ने डेढ़ महीने पहले पशु अस्पताल में बीमार घोड़े का इलाज करवाया था। घोड़े का नाम डांसर था। पशु चिकित्सक ने लक्षणों के आधार पर घोड़े के ब्लड सैंपल लेकर रिपोर्ट भेजी थी। इसके बाद दो बार घोड़े के ब्लड के सैंपल लेकर हिसार स्थित प्रयोगशाला में भेजे गए थे। इसमें घोड़े में ग्लैंडर्स की पुष्टि हुई थी। इसके बाद कलेक्टर के आदेश के बाद गुरुवार घोड़े को किलिंग प्रक्रिया के तहत 4 दर्द रहित इंजेक्शन दिए गए। इसके 10 मिनट बाद डांसर की मौत हो गई।

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सबका प्यारा था ‘डांसर’

चिचोली के रहने वाले दिलीप राठौर का डांसर नाम का घोड़ा था। दिलीप ने एक साल पहले ही उसे एक लाख रुपए में खरीदा था। इसे वे शादियों के ऑर्डर पर ले जाते थे। जैसे ही उन्हें उसकी बीमारी का पता चला, वे परेशान हो गए। चूंकि यह बीमारी जानवरों और इंसानों के लिए खतरनाक है, इसलिए उन्होंने दिल पर पत्थर रख यह निर्णय किया।

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क्या है ग्लैंडर्स बीमारी

ग्लैंडर्स’ जेनेटिक बीमारी है। यह बीमारी ज्यादातर घोड़े, गधों और खच्चरों को होती है। बीमारी से पीड़ित पशु को मारना ही पड़ता है। अगर कोई पशुपालक बीमारी से ग्रसित पशु के संपर्क में आता है, तो ये मनुष्यों में भी फैल जाती है। लाइलाज होने के कारण बीमारी से पीड़ित पशु को यूथेनेशिया (इच्छा मृत्यु) दिया जाता है। इसके बाद पशु गहरी नींद में चला जाता है। करीब 10 मिनट में नींद के दौरान ही उसकी दर्द रहित मौत हो जाती है।

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ये हैं नियम

डॉ. केसी तंवर ने बताया कि ग्लैडर्स एंड फायसी एक्ट के 1899/13 एक्ट के तहत पशु पालक दिलीप राठौर को 25 हजार रुपए का मुआवजा मिलेगा। ब्रिटिश कालीन ब्लेजर एंड फाइसी 1899/13 एक्ट के तहत ब्रिटिश काल में इस प्रक्रिया के तहत मृत घोड़े के मालिक को 50 रुपए का मुआवजा दिया जाता था।

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