कोरोनाकाल में आमजन को हो रही परेशानी के बीच स्कूली छात्रों के चेहरे पर खुशी लौटी है। प्रदेश के चंपावत जिले में पिछले तीन सालों से बंद पड़े एक सरकारी प्राइमरी स्कूल को दोबारा खोला गया है। अध्यापकों की तैनाती के साथ ही छात्रों का स्कूल में  एडमिशन भी हो गया है।

कोविड-19 की वजह से लागू लॉकडाउन में काफी संख्या में प्रवासी वापस गांव लौटे हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होता देख अभिभावकों ने गांव में बंद पड़े स्कूल को खोलने की गुहार लगाई, जिसे शिक्षा विभाग ने स्वीकार कर लिया।

चंपावत जिले के बाराकोट ब्लॉक के उप शिक्षा अधिकारी भानू प्रताप सिंह कहते हैं  कि छात्रों की कम संख्या की वजह से स्कूल को बंद करना पड़ा था। पिछले तीन सालों से कई बार प्रयास करने के बाद भी छात्रों की संख्या नहीं बढ़ पाई थी।

प्रवासियों के गांव में वापस लौटने के बाद छात्रों की संख्या भी बढ़ी जिसके बाद स्कूल को तीन साल बाद दोबारा खोल दिया गया है। स्कूल में 16 छात्रों का एडमिशन भी करवा दिया गया है।

चंपावत मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर बाराकोट ब्लॉक के गविंदा गांव के सरकारी प्राइमरी विद्यालय को छात्रों की कम संख्या की वजह से तीन साल पहले बंद कर दिया था। लेकिन, अब प्रवासियों के पास लौटने के बाद छात्रों का एडमिशन हो गया है।

गविंदा गांव की प्रधान पुष्पा देवी कहती हैं कि गांव के बच्चों को पढ़ाई के लिए आसपास के स्कूल में जाना पड़ता था लेकिन अब प्रवासियों के वापस आने के बाद छात्रों की संख्या भी बढ़ गई है, जिससे स्कूल तीन साल बाद दोबारा खुल गया है।

चंपावत जिले के बाराकोट ब्लॉक के उप शिक्षा अधिकारी भानू प्रताप सिंह कहते हैं  कि स्कूल में अध्यापक की तैनाती कर दी गई है। कोविड-19 की वजह से स्कूल फिलहाल बंद है, लेकिन सरकार की गाइडलाइन के अनुसार, स्कूल जब खुलेंगे तब छात्र स्कूल आ सकते हैं।

गविंदा गांव के बसंत वल्लभ जोशी कहते हैं कि  उन्होंने अपनी बेटी को स्कूल में दाखिला करवा दिया है।  स्कूल जब खुलेगा तब उनकी बेटी स्कूल में पढ़ने जाएगी।

चंपावत जिले के जिला शिक्षा अधिकारी रमेश पुरोहित कहते हैं कि  स्कूल को तीन साल बाद खोल दिया गया है ताकि प्रवासियों के बच्चों की पढ़ाई को नुकसान न हो। वह कहते हैं कि एकेडमिक सेशन के बीच में भी छात्रों का एडमिशन हो जाएगा ताकि छात्रों की पढ़ाई का नुकसान न हो। बताया कि स्कूल खुलने के बाद शिक्षा अधिकारियों की एक टीम वास्तविक स्थिति का जायजा लेने के लिए स्कूल का निरीक्षण भी करेगी।

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