उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने से मची तबाही में अबतक 32 लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 200 से ज्यादा लोग लापता हैं। जिस वक्त तबाही मची उस समय एनटीपीसी की एक टनल में काफी लोग काम कर रहे थे। अचानक आई बाढ़ की वजह से टनल में पानी और मलबा जमा हो गया। जिसके चलते टनल में करीब 1 दर्जन लोग फंस गए। बर्फीले पानी और गाद में फंसे लोग अपने जिंदा रहने की उम्मीद लगभग खो चुके थे।

जो हुआ वह किसी चमत्कार से कम नहीं था

तभी वह चमत्कार हुआ जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है। तभी वहां फंसे एक व्यक्ति को मोबाइल में नेटवर्क नजर आया। उसने अधिकारियों को जानकारी दी और इसके बाद इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस उन्हें बचाने में जुट गई। मौत को मात देकर बाहर आए राकेश ने जब अपनी आपबीती बताई तो सुनने वालों का भी कलेजा फट गया।रविवार सुबह उत्तराखंड में जब ये तबाही मची तब जोशीमठ में बाबा बद्री विशाल मंदिर के पास रहने वाले 27 वर्षीय राकेश भट्ट 11 अन्य लोगों के साथ तपोवन में भूमिगत सुरंग में काम कर रहे थे।

कई घंटो लोहे की रॉड पर लटके रहे मजदूर

उन्होंने कहा कि जब वे लोगों को बाहर निकलने के लिए चिल्लाते हुए सुना तो बारह लोग सुरंग में थे। इससे पहले कि हम कोई प्रतिक्रिया देते पानी का बड़ा गुबार और गाद टनल में घुस चुकी थी। हम चीखते रहे, लेकिन किसी ने हमारी आवाज नहीं सुन पाई। सुरंग में एक झटके में अंधकार आ गया। हम सब फंस चुके थे। राकेश ने बताया कि, जब सुरंग में पानी भरने लगा तो वहां सभी लोग जेसीबी पर चढ़ गए और लोहे की छड़ों पर बैठ गए। नीचे कीचड़ था, पानी था। सभी लोग घबराये थे। पानी का कचरा लगातार बढ़ता जा रहा था। ये सभी लोग रॉड से लटके हुए थे।

हाइपोथरमिया से बचने के लिए मजदूर करते रहे एक्सरसाइज

राकेश ने कहा कि एक बार पानी का स्तर कम हो जाने के बाद, उन्होंने अंधेरे में एक-दूसरे को बुलाया और साथ रहने का फैसला किया। एक्‍सेवेटर के ड्राइवर राकेश भट्ट ने बताया कि उन सभी ने बीच-बीच में 10-10 मिनट के लिए तीन-तीन लोगों के बैच को वाहन की छत पर बैठने का तय किया। इससे सभी को कुछ आराम मिल सके। वहीं बैठकर सभी बारी-बारी से खुद को गर्म रखने के लिए एक्‍सरसाइज कर रहे थे। ताकि हाइपोथरमिया से उनकी जान ना चली जाए।

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