भारत में गरीबी एक बड़ी समस्या है, यहाँ ऐसे बहुत से लोग है जिन्हें दो वक्त का खाना भी बड़ी मुश्किल से नसीब होता है। परिवार का हर सदस्य चाहे वो छोटा हो या बड़ा उसे कुछ ना कुछ काम करना पड़ता है। यहाँ तक की परिवार के जिस बच्चे को जिस उम्र में पढाई करनी चाहिए उस उम्र में उसको काम करना पड़ता है। तब जाकर पुरे परिवार का पालन पोषण हो पाता है। ऐसे वक्त में किसी के लिए भी शिक्षा हासिल करना बहुत ही मुश्किल होता होता है।

लेकिन कुछ लोग होते है जिनके अंदर शिक्षा हासिल करने का और जीवन में आगे बढ़ने का जजबा और जनून होता है। और वो हर परिस्तिथि का सामना करते हुए आगे बढ़ते है। अपने जीवन में सफलता हासिल करते है। और एक दिन ना केवल अपना बल्कि अपने माता पिता और गांव- शहर का नाम पुरे देश में रौशन करते है।

उन्ही में से एक राजस्थान के अलवर जिले में रहने वाली लड़की रवीना भी है। जिन्होंने गरीबी की हर परिस्तिथि का सामना किया। संसधानो का अभाव होते हुए भी अपनी पढाई की सही ढंग से जारी रखा और आज कक्षा 12 में 93% अंको के साथ राजस्थान राज्य में टॉप किया। इससे ना केवल उसके परिवार की गांव और समाज में इज्जत बढ़ी बल्कि राजस्थान राज्य भी गौरान्वित महसूस करने लगा।

बता दे की रवीना अलवर जिले के गढ़ी मामोड़ गांव की रहने वाली है। जिसकी उम्र केवल 17 साल है। लेकिन अफ़सोस एक तरफ जहां उसके पिता रमेश गुर्जर की 12 साल पहले सांप के काटन से मौत हो गई थी, वही अब उनकी माँ भी दिल की मरीज है। और काफी बीमार रहती है। वही, रवीना के पास रहने के लिए पक्का मकान भी नहीं है। वो झोपडी की तरह बने एक घर में रहती है जिसमे बिजली की सुविधा भी नहीं है। जिससे वो रौशनी में बैठकर पढाई कर सके।

जी हां, आपको जानकर हैरानी होगी की आज 12 वीं में रवीना ने जो सफलता हासिल की है वो उसने लालटेन और टोर्च आदि की की रौशनी में पढकर की है। रवीना चार भाई बहन है, जिसमे रवीना तीसरे नंबर की है। रवीना से छोटा उसका एक भाई है और एक बहन है। रवीना अपनी पढाई के साथ साथ अपने भाई बहन का भी ध्यान रखती है।

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