बिहार के सीतामढ़ी जिले के अंतर्गत आने वाले बररी फुलवरिया पंचायत के बसौल गांव की रहने वाली सुखचैन देवी लोगो की हजामत बनाती है। सुखचैन देवी से सब इसके पीछे की वजह जानने की कोशिश की गयी तो उनका कहना है की 16 साल पहले उनकी शादी पटदौरा गांव में रमेश से हुयी थी। लेकिन गरीबी के चलते उन्हें अब लोगो की हजामत बनानी पड़ रही है।

 

 

सुखचैन देवी ने जानकारी दी की ससुराल में उनके पास कोई जमीन नहीं है और पिता की मौत के बाद 2 बेटों और एक बेटी के अलावा माँ की जिम्मेदारी उनके कंधो पर आ गयी। पति रमेश भी चंडीगढ़ में बिजली मिस्त्री करते है लेकिन उससे घर चलना मुश्किल हो रहा था। इसलिए उन्होंने अपने पुरखो के काम को शुरू किया।

 

 

 

लोग पहले सुखचैन से बाल-दाढ़ी बनवाने से सोचते थे। लेकिन अपने मायके में रहने की वजह से लोग बेटी व बहन मान बाल-दाढ़ी बनवाने लगे। वह गांव में सुबह कैंची, कंघा और उस्तरा लेकर निकल जाती है और शाम तक 200 रुपये कमा लेती है शादी में भी महिलाओं के बाल और नाखून कटती है।

 

 

 

 

सुखचैन का कहना है कि और पैसे तथा ट्रेनिंग मिले तो वह ब्यूटी पार्लर खोलेंगी। वह चाहती है की उनके बच्चे अच्छी तरह से पढ़-लिख ले। सुखचैन यह काम 2 पहले शुरू किया था।

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