|

झोपड़ी में रहकर काटे दिन, माँ कूड़ा बीन बीनकर माँ ने चलाया घर, सड़कों पर भीख मांगकर की पढाई, अब आपने दम पर संध्या खुद बनी सॉफ्टवेयर इंजीनियर

इन्सान की सबसे बड़ी मजबूरी खाली पेट और खाली जेब होती है. इसके लिए इन्सना कुछ भी कर सकता है, दो वक्त की रोटी के लिए भीख भी मांग लेता है  गरीबी में जिंदगी गुजारने वाली लड़की की कहानी सामने आई है जिसने सडको पर भीख मांगकर अपनी पढाई की और आज इंजीनियर बन गयी है.

पटियाला की रहने वाली संध्या पिता ट्रक यूनियन में रेहड़ी चलाते हैं और मां कूड़ा बीनती हैं, घर में सबसे बड़ी बड़ी संध्या है और घर की कुछ जिम्मेदारी संध्या के कंधो पर भी आ गयी थी संध्या आपने घर में पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं,.

एक साल का कोर्स और बन जायंगी इंजीनियर 

जल्द ही एक बड़ी सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन जाएगी और उसकी सारी गरीबी भी दूर हो पाएगी। झोपड़ पट्टी के बच्चों के लिए संध्या अब रोल मॉडल बन गई है।  संध्या का एक साल का कोर्स है जिसकी पढाई करने के बाद इंजीनियर बन जायंगी.

दसवी में किया टॉप 

संध्या ने सबसे पहले तो दसवीं कक्षा पास की, संध्या ने दसवी में टॉप किया था इसके बाद नवंबर, साल 2019 में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कोर्स की प्रवेश परीक्षा क्लियर कर लिया था संध्या को हमेशा अपनी पढाई छुटने का डर रहता था.

काटे बुरे दिन :

संध्या का कहना है, ‘परिवार को कर्ज में देख कर मैं मजबूर हो गई थी इसलिए बचपन में भीख मांगी और फिर पढ़ाई के लिए दुकानदार के घर पर काम किया। लोगों के आगे हाथ फैलाकर भीख मांगना मेरी जिंदगी के सबसे बुरे दिन रहे।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published.