पुलिस अंकल.., प्लीज मुझे मेरे पापा के घर पहुंचा दीजिए। यहां मेरा मन नहीं लगता, मुझे पापा की बहुत याद आ रही है।

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पुलिस अंकल.., प्लीज मुझे मेरे पापा के घर पहुंचा दीजिए। यहां मेरा मन नहीं लगता, मुझे पापा की बहुत याद आ रही है। ये शब्द  हैं उस 7 साल के उस बच्चे के जो घर का रास्ता भटक गया था और उसको समझ नही आ रहा था वो अपने पापा से कैसे मले तो उसे रास्ते में खड़े दिखे पुलिस वाले से ही गुहार लगा दी.

दरसल ये मामला है  यशोदानगर नौबस्ता चौराहे का यहाँ ड्यूटी पर तैनात टीएसआइ से एक बच्चा आकर कहता है की  पुलिस अंकल.., प्लीज मुझे मेरे पापा के घर पहुंचा दीजिए। यहां मेरा मन नहीं लगता, मुझे पापा की बहुत याद आ रही है। तो वो तुरंत समझ गए की बच्चा घर का रास्ता भटक गया है

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बच्चे ने पूछताछ में अपनी पहचान उन्नाव धवन रोड बड़ा चौराहा निवासी ओम और पिता का नाम सुनील मिश्र बताया। इस पर उन्होंने हमराही गार्ड मुस्तकीम और राजीव की मदद से नौबस्ता थाने की यशोदा नगर चौकी पुलिस से संपर्क किया।

चौकी पुलिस ने उन्नाव कोतवाली पुलिस से संपर्क कर स्वजन तक बच्चे के बारे में जानकारी पहुंचाई। करीब डेढ़ घंटे बाद सुनील यशोदा नगर चौराहे पहुंचे, जहां बच्चे को सकुशल देखकर उन्होंने टीएसआइ और पुलिस कर्मियों को धन्यवाद दिया।

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सुनील ने बताया कि बेटा कुछ दिनों से मछरिया कानपुर में रहने वाली मौसी के घर पर रह रहा था, जहां से बिना बताये वह घर से निकल आया था। घरवाले भी उसकी तलाश कर रहे थे, इस बीच उसे भी जानकारी दी गई। वह कानपुर के लिए निकल ही रहे थे कि पुलिस ने बच्चे के मिलने की जानकारी दी।

Source श्भार : जागरण

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