प्रथ्वी के आलावा वैज्ञानिक दुसरे ग्रहों पर भी जीवन तलाश रहे हैं. इसके लिए वैज्ञानिक दिन रात एक करके मेहनत कर रहे हैं. इन ग्रहों में मंगल, चन्द्रमा आदि शामिल हैं.

इन ग्रहों पर इंसानों को रहने के लिए सबसे जरूरी है हवा और पानी, इसको खोजने के लिए वैज्ञानिक हर साल बड़े बड़े याँ इन ग्रहों पर भेजते हैं जिससे कुछ अच्छी जानकरी हांसिल की जा सके. अब इसी कड़ी में मंगलर गढ़ पर पानी होने की उम्मीद जागी है और एक अहम कड़ी हाथ लगी है.

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जर्मनी के मिनरेलिस्ट ऑगस्त ब्रेथपॉट ने साल 1843 में एक हाइड्रो हेमाटाइट की खोज की थी जिसक अब द्वारा से अधयनन किया जायेगा.

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रिपोर्ट के मुताबिक  पृथ्वी पर मिली इस चट्टान और मंगल ग्रह की ‘ब्लूबेरी’ चट्टान में काफी समानताएं हैं जिससे इन चट्टानों पर पानी होने की सम्भावना हो सकती है

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पेन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पीटर जे. हेनी ने कहा, ‘धरती पर ये संरचनाएं हाइड्रो हेमेटाइट हैं, इसलिए मुझे यह अनुमान लगाना उचित लगता है कि मंगल ग्रह पर चमकीले लाल कंकड़ हाइड्रो हेमाटाइट ही हैं.’

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चेन ने 19वीं सदी के पत्थरों पर कई टेस्ट किए, जिसमें नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल किया गया है  जिससे पता चलता है इन चटानो में पानी हो सकता है

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वैज्ञानिक कहते है की मंगल ग्रह पर हाइड्रो हेमाटाइट की उपस्थिति वो सबूत प्रदान कर सकती है, जिससे ये साबित होगा कि इस ग्रह पर पानी है.

Journalist from Gurugram. At @News Desk she report, write, view and review hyperlocal buzz of Delhi NCR. Can be reached at [email protected] with Subject line starting Meenakshi

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