शर्त के साथ कहता हूँ पुराने जमाने के इन रसोइयों के देखकर आपके बचपन की यादें ताज़ा हो जाएंगी

भारतीय समाज में रसोईघर को मंदिर की तरह माना जाता है। कहा जाता है हमारे  रसोईघर में अन्न देवता का वास होता है क्योंकी यह हर इंसान का पालन-पोषण करता है। पूराने समय के रसोईघरों में बने खाने की बात ही कुछ अलग होती थी। आजकल का भोजन प्रेशर कुकर व गैस पर बनता है, जो सेहत के लिए लाभदायक नहीं होता। पूराने समय में मिट्टी के बने चूल्हे पर भोजन बनता था, जो पौष्टिक होने के साथ ही स्वादिष्ट भी होता था। जिन लोगों ने मिट्टी के चूल्हे पर बना भोजन खाया है, वे लोग ही इसका अंतर समझ सकते हैं।

तो चलिए देखते हैं पुराने जमाने की पूराने जमाने के रसोईघर की खूबसूरत तस्वीरें जिन्हें देखकर पुरानी यादे तजा हो जायंगी

1. इस तस्वीर में एक महिला रोटियां बना रही हैं। इस तस्वीर में कांसे की पारात, पत्थर का चकला, लकड़ी का बेलन, कांसे की कटोरी में घी दिया गया है। कांसे के बर्तन में भोजन बनाना सेहत के लिए लाभदायक होता है। आजकल अधिकांश महिलाएं एल्युमीनियम या स्टील के बर्तन में ही खाना बनाती हैं।

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2. इस तस्वीर में बना हुआ खाना टिफिन में डाला जा रहा है। चूल्हे में आग जल रही है और इसके ऊपर कुछ पकाने के लिए बड़ा बर्तन रखा गया है। चूल्हे के पास एक चिमटा व फूंकनी रखी हुई है। फूंकनी का प्रयोग चूल्हे में आग जलाने के लिए होता है।

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3. यह सभी चीजों से परिपूर्ण रसोईघर है। इसमें एक महिला खाना पका रही है। पास में सब्जियाँ व जरूरी मसाले रखे हुए हैं। दीवार पर बने एक स्टेंड पर लकड़ी के बड़े चम्मचे रखे गए हैं। छत पर एक रस्सी की सहायता से दही की हांडी लटकी हुई है। ये सभी चीजें आपके भोजन को स्वादिष्ट बनाने का काम करती हैं।

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4. यह एक पूरानी तस्वीर है। इसमें एक महिला कांसे के बर्तन में आटा गूंध रही है। जिस बर्तन में आटा रखा गया है वह मुल्तानी मिट्टी व कागज का बना हुआ है। पूराने समय में महिलाएं इस बर्तन को अपने हाथों से बनाती थी। इस रसोईघर में एक अलमारी बनी हुई है, जिसमें जरूरी सामान रखा जाता था।

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दोस्तो, आज के किचन व पूराने जमाने के रसोईघर में क्या फर्क नजर आता है? हमें जरूर बताएं ।

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