सड़क पर झाड़ू लगाने वाले पिता का बेटा बना आर्मी में ऑफिसर, लोगो ने कहा था ‘तुम्हारी हैसियत से बाहर है’

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इस दुनिया में बहुत से गरीब बच्चे अपने गरीब मां-बाप का सपना पूरा कर उन्हें गर्व महसूस कराते हैं ऐसे कई उदाहरण हमारे सामने नजर आते हैं एक ताजा उदाहरण उत्तर प्रदेश के चंदौली से देखने को मिला है। चंदौली में सफाई कर्मचारी के तौर पर कार्यरत विजेंद्र कुमार के बेटे ने आर्मी ऑफिसर बन कर अपने बाप का सपना पूरा करके दिखाया है।

 

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विजेंद्र कुमार ने बताया कि आज से 10 साल पहले उन्होंने सोचा कि उनका बेटा भी आर्मी ऑफिसर बने। तब उस समय कुछ लोगों ने उनकी बात का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि तुम्हारी हैसियत नहीं है कि तुम्हारा बेटा एक आर्मी ऑफिसर बने। लेकिन विजेंद्र कुमार हिम्मत नहीं हारे और उनकी कड़ी मेहनत की वजह से आज उनका बेटा एक सफल आर्मी ऑफिसर बन चुका है।

 

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अपने प्रयास के एक लम्हे को साझा करते हुए विजेंद्र ने बताया कि उन्होंने अपने बड़े बेटे सुजीत को पढ़ने के लिए राजस्थान भेजा था। कड़ी मशक्कत के बाद 12 जून शनिवार को एक पिता का सपना पूरा हुआ। क्योंकि उनका बेटा सुजीत देहरादून के इंडियन मिलिट्री एकेडमी से ग्रेजुएट पास हुआ था। पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

 

21 साल के सुजीत चंदौली के बसीला गांव के इकलौते इंडियन आर्मी ऑफिसर बने हैं। वही बड़े भाई की उपलब्धि के बाद सुजीत के छोटे भाई-बहन उनके लिए एक रोल मॉडल बन चुके हैं। मीडिया से बात करते हुए विजेंद्र कुमार ने बताया कि मैंने ठान लिया था कि मैं झाड़ू उठाया हूं लेकिन मेरा बेटा अब बंदूक ही उठाएगा और देश की सेवा करेगा।

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लेकिन इस परिवार का एक सपना अधूरा ही रह गया क्योंकि इस कोरोना वायरस में सुरक्षा नियमों की वजह से प्रतिभागियों के परिजनों को इस समारोह में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई थी। जिसके वजह से सुजीत के परिवार को टीवी पर ही पासिंग आउट परेड को देखकर संतोष करना पड़ा।

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बतादे की विजेंद्र कुमार के कुल 4 बच्चे हैं जो इस समय वाराणसी में रहता है। वही सुजीत आर्मी ऑर्डिेनेंस कॉर्प्स जॉइन करना चाहते हैं और उम्मीद है कि उनकी इस सफलता से उनके गांव के और भी युवा प्रेरित होकर भारतीय सेना में अपनी सेवा देंगे।

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