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4 भारतीय खिलाड़ी जिन्हें चयनकर्ताओं से पंगा लेना पड़ा भारी, समय से पहले करियर हुआ खत्म, नंबर 2 को धोनी भी नही बचा सके

भारतीय क्रिकेट बोर्ड दुनिया का सबसे अमीर बोर्ड है और इसलिए हर बोर्ड भारतीय क्रिकेट बोर्ड के आगे झुकता भी हैं, इसलिए हर खिलाड़ी एक बार भारतीय टीम में शामिल होना जरूर चाहता है लेकिन ऐसे कुछ खिलाड़ी हैं जिन्हें भारतीय टीम के चयनकर्ताओं से पंगा लेकर अपना करियर का अंत कर लिया.

भारतीय  टीम में कई खिलाड़ी ऐसे भी हुए हैं, जिन्होंने भारत के लिए अच्छा क्रिकेट तो खेला, मगर उन्हें टीम के कप्तान व चयनकर्ताओं का सपोर्ट नहीं मिला. जिसकी वजह से वो टीम इंडिया से बाहर हो गए और बहुत कम समय में करियर खत्म हो गया.

आज हम आपको ऐसे ही कुछ खिलाडियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो टीम इंडिया के चयनकर्ता से भीड़ गए और उसके बाद उन्हें भारतीय टीम में शामिल नही किया गया और समय से पहले ही उनका करियर खत्म हो गया.

मुरली विजय

मुरली विजय भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाज हुआ करते थे उन्होंने 2008 में भारत के लिए डेब्यू किया था और उसके बाद उनका प्रदर्शन बहुत अच्छा था मगर 2018 में इंग्लैंड दौरे पर मुरली विजय को टीम से अचानक ड्रॉप कर दिया गया. और उसके बाद से उन्हें भारतीय टीम में शामिल नही किया गया.

अंबाती रायडू

अंबाती रायडू के करियर पर ग्रहण लगाने का कारण विराट कोहली को माना जाता आईसीसी विश्वकप 2019 के पहले तक विराट कोहली और टीम मैनेजमेंट अंबाती रायडू को विश्वकप टीम का नंबर-4 खिलाड़ी बता रही थी.अंबाती को विजय शंकर व शिखर धवन के इंजर्ड होने के बाद भी लगातार नजरअंदाज किया गया और खिलाड़ी ने संन्यास का ऐलान कर दिया

वसीम जाफर

साल 2009 में, जब वसीम जाफर को टीम इंडिया से ड्रॉप किया गया तब उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा था, कि ‘वास्तव में, मुझे नहीं पता कि चयनकर्ताओं को कैसे प्रभावित किया जाए. मैंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 13,000 से अधिक रन बनाए हैं और पिछले रणजी सत्र में 1,260 रन बनाए हैं.मुझे नहीं लगता कि उन्होंने (चयनकर्ताओं ने) इस पर ध्यान दिया है. यह सब मैं क्या कर सकता हूं और उन्हें यह एहसास दिलाता रहूंगा कि मैं भारत के लिए खेलना अभी भी अच्छा हूं.’

मनोज तिवारी

मनोज तिवारी धुरंधर बल्लेबाजों में से एक थे, मनोज तिवारी ने मनोज ने 2008 में भारत के लिए डेब्यू किया. 2011 में तिवारी ने वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम ने अपना पहला टेस्ट वनडे लगाया.मनोज को  24 मुकाबलों में स्क्वाड में तो शामिल किया, लेकिन बदकिस्मती से एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला.

 

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