ये पिज्जा थोड़ी है जो आर्डर करने के 15 मिनट बाद आ जाएगा, सफलता वक्त मांगती है. और यदि किस्मत साथ ना हो तो सब्र भी रखना पड़ता है. इसी के साथ लगातार कड़ी मेहनत भी करनी पड़ती है. ऐसा ही कुछ क्रिकेट जगत में भी होता है. देशभर के हजारो युवा क्रिकेट में अपना कैरियर बनाना चाहते है. इसके लिए वो कड़ी मेहनत करते है घेरलू क्रिकेट और अलग अलग टूर्नामेंट में अपना बेस्ट प्रदर्शन देते है. इसके बाद कही जाकर उन्हें देश की नेशनल टीम में चयन होता है.

लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते है जो मेहनत तो करते है लेकिन सब्र करना नहीं जानते. इसी के चलते आज हम आपको ऐसे ही 3 क्रिकेट खिलाडियों से मिलवाने वाले है जिन्हें कड़ी मेहनत के दम पर टीम इण्डिया में अपनी जगह तो बनाई लेकिन सब्र नहीं कर पाए और अपना पेशा बदल लिया. लेकिन ईश्वर की भी कृपा ऐसा रही की ये क्रिकेट छोड़ने के बाद भी मशहूर हो गये. तो चलिए जानते है..

1.हार्दिक संधू:-

हार्दिक संधू आज पंजाब के मशहूर सिंगर है. ये नाह गौरी, जोकर और डांस आदि पंजाबी भाषा के गानों के लिए प्रसिद्ध है. लेकिन इस बात को कुछ ही लोग जानते है की हार्दिक संधू टीम इण्डिया के तेज गेंदबाज रह चुके है. साल 2007 में चोटिल होने की वजह से इन्हें टीम से बाहर कर दिया गया था. इसके बाद इन्हें क्रिकेट को अलविदा ही कह दिया. आपको जानकर हैरानी होगी की हाल ही वर्ल्डकप विजेता कपिल देव की बायोग्राफी 83 आई थी. जिसमे कपिल देव का रोल रणवीर सिंह ने और इनकी पत्नी का रोल दीपिका पादुकोण ने किया था. इसी फिल्म में हार्दिक संधू ने पूर्व तेज गेंदबाज मदन लाल की भूमिका निभाई थी.

2.तेजस्वी यादव:-

आज इन्हें कौन नहीं जानता? तेजस्वी यादव आज देश के बिहार राज्य की राजनीती के सबसे बड़े राजनेता है. जी हां, ये लालू प्रसाद यादव के बेटे है. और आज बिहार के उप मुख्यमंत्री है. बता दे की इन्होने अपने क्रिकेट कैरियर की शुरुआत झारखण्ड रणजी से की थी. ये अंडर 19 में विराट कोहली के साथी भी रहे, इतना ही नहीं साल 2009 में इन्होने आईपीएल में डेयरडेविल्स टीम का हिस्सा रहे. इसके बाद इन्होने क्रिकेट छोड़ दिया. और साल 2012 में राजनीती में कदम रख दिया.

3.आकाश चौपडा:-

आकाश चौपडा आज के समय में टीम इंडिया के जाने माने क्रिकेट कमेंटेटर है. आज इनकी शानदार कमेंट्री का हर कोई दीवाना है. लेकिन आपको बता दे की इन्होने साल 2003 के अंत में न्यूज़ीलैण्ड के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था. इसी के साथ ये दिल्ली टीम वीरेंद्र सहवाग के साथी भी रह चुके है. लेकिन ये सहवाग जीतना नाम नहीं कम पाए. और इन्हें मौके भी बहुत कम मिले. जब ये साल 2008 में आईपीएल में विफल हुए तब इन्हें लगा की बस की बात नहीं है. तो इन्होने क्रिकेट के तीनो फोर्मेट से संन्यास ले लिया.

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