कहते है की माता पिता भले ही अनपढ़ हो या बहुत ज्यादा गरीब हो इसके बावजूद भी वो अपनी संतान को अच्छी से अच्छी शिक्षा देने चाहते है और उन्हें खूब पढ़ना चाहते है. ताकि उनके बच्चे भी बाकी लोगो की तरह अपने जीवन में कामयाब हो सके और देश की प्रगति में अपना हम योगदान दे सके. भले ही उन्हें मौसम की किसी भी परिस्थिति में काम करना पड़ा, और वो ऐसा करते भी है. और अपनी संतान को खूब योग्य बनाते है.

आज हम आपको एक ऐसे ही गरीब पिता की काहनी आपको बताने वाले है, जिसने फूटपाथ पर टोपियाँ आदि बेच बेचकर खूब मेहनत करके घर का खर्चा भी चलाया और अपनी बेटी को भी अच्छे से खूब पढाया. ताकि आगे चलकर वो अपने जीवन में कुछ कर सके और अपने जीवन को सफल बना सके. दूसरी तरफ इस पिता की बेटी ने भी अपने पिता की मेहनत को कामयाब भी किया.

जी हां, हम बात कर रहे झारखण्ड राज्य के रांची शहर में रहने वाले सख्स जिशम अख्तर और उनकी बेटी सिमरन नौरीन की. सिमरन नौरीन बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में काफी होशियार है. वो चाहती थी की मैं इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढू लेकिन गरीबी के कारण वो उसकी ये खुवाहिश खुवाहिश ही बनकर रह गई. बहरहाल वो प्राइवेट स्कूल में पढ़ी और खूब मेहनत की. और संकल्प लिया की वो भी अपने पिता की मेहनत को बर्बाद नहीं जाने देगी.

समीरन झारखण्ड में कान्वेंट गर्ल्स स्कूल की 12 वीं की छात्र है, ऐसे में जब झारखण्ड राज्य का 12 वीं का रिजल्ट आया तो वो अपने रिजल्ट को देखकर चौक गई, क्योकि उसका रिजल्ट उम्मदी से भी कही अधिक बेहतर था. जी हां, सिमरन नौरीन के 12 वीं में 500 में से 478 अंक आये, यानि 95.5 % अंक थे. और जिले में उसका प्रथम स्थान था.

सिमरन नौरीन की माँ इशरत बताती है, की जब बढ़ के कारण सब काम धंधा बंद हो गया था तब उसके पिता जी ने जैसे तैसे मेहनत करके पैसे कमाये और घर का खर्चा चलाया. वही, उनकी बेटी नौरीन ने भी पढ़ाई में दिन रात एक कर दिया. जिसका नतिज अब आपके सामने है.

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