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दोस्ती की हुई मौत तो दोस्त बने उसके परिवार के देवदूत, लाखों का घर बनवाया..हर माह देते 15 हजार

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कहा जाता है भगवान कुछ न दे बस दो दोस्त सही दे  जो वक्त पर काम आ जाये और बुरे वक्त में साथ छोडकर ना जाये, दोस्ती की एक ऐसा रिश्ता होती है जिसकी कोई कीमत नही होती, इसी दोस्ती की मिशाल पेश की है झारखंड के जमशेदपुर के 40 दोस्तों ने जी हाँ अपने सही सुन्हा, इनकी कहानी जानकर आपकी आँखों में आंसू आ जायंगे.

दरअसल दोस्ती की ये कहानी है जमशेदपुर के गोड्डा की है, यहाँ वीरेंद्र कुमार (29) अपनी बूढ़ी मां , पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता था। वह फोटो- वीडियो ग्राफी करके परिवार का पेट पालता था। हर वक्त अपने परिवार का ख्याल रखता था लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था 22 दिसंबर 2019 को एक हाइवा के टक्कर लगने के बाद उसकी मौत हो गई।

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अब उसके परिवार का रो रोकर बुरा हाल था, बूढी माँ रो रोकर बार बार बेहोश हो रही थी, क्योंकी वीरेंद्र घर में कमाने वाला अकेला था और घर का खर्च भी वही चलाता था लेकिन उसके जाने के बाद कौन उसके बच्चो को पढ़ायेगा ये बात अंदर ही अंदर माँ को खाए जा रही थी.

जब बचपन के दोस्तों की वीरेंद्र की मौत की खबर लगी तो 40 दोस्त देवदूत जमा होकर उसके घर पहुंच गए। मां को समझाने लगे कि आप चिंता नहीं करे आपका एक बेटा गया है, लेकिन अभी 40 जिंदा हैं।

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पहले तो सभी ने कलेक्शन करके पीड़ित परिवार के लिए 7 लाख रुपए खर्च कर घर बनवाया।  उन्होंने ग्रह प्रवेश भी बड़े विधि विधान से करवाया.अब सभी दोस्त इस परिवार  के गुजर-बसर के लिए हर महीना 15 हजार रुपए देते हैं।

 

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