भारतीय क्रिकेट टीम में बहुत से कप्तान हुए है और आगे भी बहुत से कप्तान आयेंगे और जायेंगे। लेकिन सौरव गांगुली की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट टीम ने जो सफलता हासिल की है वो शायद किसी अन्य कप्तान की कप्तानी में नहीं की होगी। सौरव गांगुली को भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान उस वक्त बनाया गया था, जब भारतीय टीम अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही थी। कई तरह के गंभीर आरोप लग चुके थे।

तब सौराव गांगुली ने भारतीय टीम की कमान संभाली और अपने अमूल्य प्रयासों से टीम को इ नया आयम दिया। और अपनी टीम को विदेशी जमीन पर भी जीत हासिल करने की कला सिखाई, विपक्षी टीम की आँखों में आँखे डालकर खेलना सिखाया। लेकिन बदकिस्मती से इनकी अगुवाई में टीम इण्डिया कोई बड़ा इवेंट अपने नाम नहीं कर पाई। लेकिन हां, इनकी कप्तानी में कई युवा खिलाडियों का क्रिकेट कैरियर बन गया। आज हम आपको उन्ही 5 खिलाडियों के बारे में बताने वाले है, जिनका कैरियर दादा की कप्तानी में चमका।

1.वीरेंद्र सहवाग:-

कहा जाता है की वीरेंद्र सहवाग ने अजय जडेजा की कप्तानी में टीम इण्डिया में डेब्यू किया था। तब सहवाग छठे नंबर पर बल्लेबाजी करते थे। लेकिन इनके बाद जब गांगुली के हाथो में टीम की कमान आई तब इन्होने वीरू के टैलेंट को पहचानते हुए साल 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ एक मैच में पहली बार ओपनिंग कराई थी। जिसके बाद इस खिलाड़ी ने क्रिकेट की दुनिया में अपना एक अलग ही मुकाम हासिल किया। वनडे में दुहरा शतक और टेस्ट मैच में तिहरा शतक जड़ने जैसे अकल्पनीय रिकॉर्ड कायम किये।

2.हरभजन सिंह:-

हरभजन सिंह के जीवन में एक वक्त ऐसा आया था जब उन्हें हर बार ड्राप कर दिया जाता था। जिससे तंग आकर इन्होने क्रिकेट छोड़ने का फैसला भी कर लिया था। लेकिन जब साल 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक घरेलु सीरीज में दादा ने इन्हें टीम में शामिल करने की सिफारिश की तब जाकर इन्हें टीम में मौका मिला था। उसी मैच में इन्होने हैट्रिक ली थी, और ऐसा करने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने। इसके बाद इनका नाम दुनिया के सबसे बेहतरीन स्पिन गेंदबाजों की सूचि में रखा जाने लगा। वही, इन्होने 100 टेस्ट मैच में लगभग 400 विकेट भी हासिल किये।

3.युवराज सिंह:-

इनके बारे में कहा जाता है की जब युवी 18 साल के थे तब इन्होने टीम इण्डिया में कदम रखा था। इसके बाद जब दादा के हाथो में कप्तानी आई तब दादा ने युवी पा जी को खूब सपोर्ट किया। वही, युवराज सिंह भी कप्तान की उम्मीदों पर खरा उतरते थे। यही कारण है की युवराज सिंह साल 2007 के टी 20 और 2011 के वनडे वर्ल्डकप में भारत की जीत में अहम योगदान दे पाए थे। इसके अलावा इन्होने 2002 में लार्ड्स में हुए नेटवेस्ट फाइनल में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया था।

4.महेंद्र सिंह धोनी:-

महेंद्र सिंह धोनी आज के समय भारतीय क्रिकेट के सबसे बेहतरीन कप्तान, विस्फोटक बल्लेबाज और शानदार विकेटकीपर के रूप में जाने जाते है। लेकिन इनकी सफलता के पीछे भी कही न कही दादा का भी बहुत बड़ा हाथ रहा है। धोनी को साल 2004 में दिसम्बर में टीम इण्डिया के लिए चुना गया और 2005 में इन्हें खेलने का मौका मिला। तब धोनी ये 3 नंबर पर बल्लेबाजी करते थे। लेकिन जब कप्तान गांगुली थे और उन्हें लगा की इस बन्दे में कुछ खास है, तब दादा ने इनकी पोजीशन को बदलकर ओपनिंग पर भेजा और खुद को 3 नंबर पर कर लिया था। तब दादा का ये प्रयोग सफल हुआ और धोनी के क्रिकेट ने भी एक नई दिशा पकड ली थी।

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