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मां को SDM के ऑफिस में नौकरी करते मन को लगी ठेस, ठान लिया अफसर बनूंगा, टाट पर बैठकर की पढाई, ias में 69वीं रैंक के साथ किया टॉप

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अगर कुछ करने का जज्बा हो तो रास्ते में कितने भी मुसीबते आयें मुकाम हासिल किया ही जा सकता है. ऐसा ही कुछ कर दिखाया एक छोटे से गांव के रहने वाले अभिषेक ने. अभिषेक जम्मू कश्मीर के रहने वाले हैं. अभिषेक ने जिन मुश्किल वक्त में पढाई की है उसका अंदाजा आप इस बात से ही लगा सकते हैं की टाट पर बैठकर और स्लेट वाले स्कूलों में पढ़ते थे

अभिषेक जिस स्कूल में पढ़ते थे उस स्कूल में ज्यादा सुविधा नही थीं. अभिषेक शर्मा  की स्कूलिंग ऐसी ही स्कूल से हुयी जहां दीवारों की ईंटें दिखती थीं, छत पर टीन थी और ज़मीन पर टाट बिछाकर बच्चों को पढ़ाया जाता था। अभिषेक की मां वहां के एसडीएम ऑफिस में क्लर्क थीं।

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अभिषेक की माँ SDM के ऑफिस में क्लर्क के पड़ पर काम करती थन, जब वह कभी कभी माँ के साथ ऑफिस जाते थे तो वहन SDM को देखकर काफी प्रभावित हुए और उन्होंने ऑफिसर बनाने की ठान ली और इसके लिए वो पढने दिल्ली चले गए लेकिन वहां से जल्दी वापस आ गए .

घर आये तो 40 दिन तक लाइट नही आयी.

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गाँव आकर पढाई करते रहे सब ठीक ही चल रहा था कि एक दिन बर्फबारी हुयी और समस्या इतनी बढ़ गयी कि उनके गांव में चालीस दिन लाइट नहीं आयी। रास्ते बंद होने से अखबार भी नहीं आया। यह वो समय था जब अभिषेक को लगने लगा कि कहीं गांव वापस आकर गलती तो नहीं कर दी।

परिवार की जिम्मेदारी 

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सबकी अपेक्षाओं का भार उनके कंधों पर था। ऐसे में अभिषेक बहुत डरे घबराये से रहते थे कि चयन नहीं हुआ तो कितनी बेइज्जती होगी। वे अपने पहले प्रयास में असफल होने का कारण भी इसी डर को मानते हैं जो उन पर भयंकर तरीके से हावी था। फिर भी अभिषेक दो बार परीक्षा में फ़ैल हुए. एक बार इंटरव्यू से बहार कर दिए गए.

तीसरी बार में किया टॉप 

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खैर इस बार अभिषेक ने बिना डरे साक्षात्कार दिया और न केवल सेलेक्ट हुए बल्कि 69वीं रैंक के साथ टॉप भी किया। अभिषेक दूसरे कैंडिडेट्स को यही सलाह देते हैं कि एक परीक्षा में सफलता को अपने ईगो से न जोड़ें

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