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कभी नेशनल हॉकी प्लेयर रही नेहा पाई पाई के लिए हुई मोहताज, दो वक्त की रोटी के लिए रेहड़ी लगाने के लिए मजबूर, फास्ट फूड बेचकर कर रही गुजारा

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कहते हैं मजबूरी इनसान से कुछ भी करवा सकती है। यदि भाग्य साथ दे तो रंक को राजा बनने में समय नहीं लगता। यदि किस्मत ही खेल खेल जाए, तो परिस्थितियां बद से बदतर भी हो जाती हैं। हमीरपुर में नेशनल हॉकी खिलाड़ी नेहा बेहद ही बुरे दौर से गुजर रही हैं. पाई पाई के लिए मोहताज नेहा को रेहड़ी लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

नेहा अपने बीमार पिता और छोटी बहन के साथ बाजार में रेहड़ी पर फास्ट फूड बेचकर किसी तरह से अपना घर चला रही हैं. जिन हाथों में हॉकी खेलकर हिमाचल प्रदेश का नाम रोशन किया, अब वह हाथ फास्ट फूड की रेहडी लगाने के लिए काम कर रहे है.

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नेहा के पिता चंद्र सिंह पिछले लंबे समय से बीमार हैं. उनका टांडा मेडिकल कॉलेज में इलाज हुआ और कई महीनों से बिस्तर पर हैं. वो मछली कॉर्नर चलाते थे.नेहा अपने परिवार के साथ छोटी सी जर्जर झुग्गी झोपड़ी में रहती हैं. कुछ समय पहले नगर परिषद हमीरपुर के वार्ड नंबर दस के पास सरकार ने चार मरले जमीन यानी 80 गज दी थी.

आठवीं कक्षा के दौरान ही उनका चयन स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के धर्मशाला हॉस्टल के लिए हुआ था. उसने राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धा में सिल्वर मेडल अपने नाम किया. हॉकी में जूनियर वर्ग में दो नेशनल खेले. वेटलिफ्टिंग में पंजाब की तरफ से नेशनल स्पर्धा में हिस्सा लिया.

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जब खेल अकादमियों को खिलाडियों की जरूरत होती है, तब तो खिलाडियों को बुलाया जाता है, लेकिन खेल खत्म होने पर खिलाडियों को भुला दिया जाता है. कई बार खेल के दौरान चोटिल भी हुई है लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं आया है.

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