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पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस की तरह प्रतिदिन बढ़ेगा आपका बिजली का बिल! सरकार जल्द ला रही है ये नियम

जैसे आज के समय में प्रतिदिन पेट्रोल डीजल और गैस के प्राइस में कमी और बढ़ोत्तरी होती है अब ऐसा ही सरकार बिजली बिल में भी करने जा रही है जिसमे प्रतिदिन प्रतियूनिट का प्राइस कम और ज्यादा होगा. ऐसे में बिजली बिल का खर्चा काफी बढ़ सकता है. सरकार इस नियम को अगले साल से लागु करने के प्लान में हैं

ऑटोमैटिक पास थ्रू मॉडल के तहत अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब ईंधन का रेट बढ़ेगा तो राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों यानी डिस्कॉम को बिजली खरीदने के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी.राजस्थान में इसकी शुरुआत हो चुकी है. जयपुर, जोधपुर और अजमेर डिस्कॉम ने बिजली उपभोक्ताओं पर 33 पैसे प्रति यूनिट का फ्यूल सरचार्ज लगाया है. इससे अगले तीन महीने तक सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं का बिजली का बिल बढ़कर आएगा… अन्य राज्य भी जल्द ही ऐसा कर सकते हैं.

सरकार की लचर नीतियों के कारण बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों के साथ वितरण कंपनियां भी भारी घाटे से जूझ रही हैं. इससे देश का ऊर्जा क्षेत्र भारी संकट के दौर से गुजर रहा है.देश में सौर ऊर्जा के लिए भले रिकॉर्ड क्षमता स्थापित कर ली गई हो लेकिन यहां अब भी ऊर्जा का प्रमुख साधन कोयला ही है। इस मांग को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर कोयले का आयात करना पड़ता है…

ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन के दाम बढ़ेंगे तो ऊर्जा उत्पादन करने वाली कंपनियां की लागत बढ़ेगी। जाहिर है वे बिजली के दाम बढ़ाकर भरपाई करने की कोशिश करेंगी. ऑटोमैटिक पास-थ्रू मॉडल रूपी हथियार का इस्तेमाल करते हुए ये कंपनियां राज्यों को महंगी बिजली बेचेंगी. इसके बाद डिस्कॉम भी बिजली की दरें बढ़ाएंगे.

सरल भाषा में समझें तो यह नई व्यवस्था पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस कीमतों में बदलाव की तरह काम करेगी… इससे जल्द ही आपको पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की तरह बिजली की कीमतों में आए दिन वृद्धि देखने को मिल सकती है. चूंकि महंगाई उस टूथपेस्ट की तरह है जिसे एक बार बाहर निकालने पर दोबारा अंदर नहीं कर सकते. जाहिर है बिजली के दाम बढ़ते हैं तो फिर इनके नीचे आने की गुंजाइश कम ही है… तमाम राज्यों के डिस्कॉम पहले ही भारी कर्ज के बोझ से दबे हुए हैं तो उनसे राहत की उम्मीद कैसे की जा सकती है.

इस मामले में तेल विपणन कंपिनयों की नीयत भी जगजाहिर है। जबसे इन्हें कीमतें तय करने की आजादी मिली है तब से इनका तिमाही मुनाफा लगातार मजबूत होता जा रहा है. अपने कर्मचारियों की सुविधाओं पर यह जमकर खर्च कर रही हैं लेकिन जब कच्चे तेल में गिरावट का दौर आता है तो ऊंची लागत का बहाना मारकर सारे मुनाफे को पी जाती हैं. बता दें कि भारत में 60 फीसद से ज्यादा बिजली का उत्पादन फोसिल फ्यूल से होता है. अगर एक राज्य बिजली की कीमतों में वृद्धि करता है तो अन्य राज्य भी उसी राह पर चलेंगे.

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