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माँ करती थी घरों में काम, पिता करते थे 5 हजार रूपये की नौकरी, अब बेटे ने फोर्ड में इंजीनियर की नौकरी पा कर सपना किया पूरा

हिंदी में एक कहावत है जहां चाह है वहां राह है, जिसका अर्थ है  अगर कोई कुछ करने के लिए इच्छा रखता है, तो वह बाधाओं की परवाह किए बिना उसे पूरा करने का रास्ता खोज लेता है, ऐसा ही करके दिखाया राजस्थान के एक शख्स ने.

राजस्थान के उदयपुर के एक मजदूर कामगार के बेटे भावेश लोहार ने फोर्ड मोटर कंपनी में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में नौकरी पा कर सभी को चौका दिया है ऐसा हुआ उनकी मजबूत इच्छा के कारण। अब वो अपनी लिंक्डइन पोस्ट में अपने संघर्ष के दिनों के बारे में बता रहे हैं जो की तेजी से वायरल हो रहा है.

भावेश लोहार ने एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान), भोपाल से पढ़ाई की है वो बताते हैं  COVID-19 महामारी के कारण अपने कॉलेज के छात्रावास को छोड़ने और अपने परिवार के सात अन्य सदस्यों के साथ एक कमरे में रहने को मजबूर होना पड़ा था.

उन्होंने अपनी पोस्ट में बताया की मैं 6 महीने 6 लोगो के साथ एक कमरे में सोया, पढ़ा और कई कम्पनियों में इंटरव्यू दिए और फोर्ड में चयनित हो गया जो की मेरे लिए भाग्यशाली था.

उन्होंने  कहा, “मैं अपनी प्यारी बड़ी बहनों के प्रति अपनी अत्यंत कृतज्ञता महसूस करना चाहता हूं जिन्होंने मेरे सपनों को जीने के लिए अपने सपनों का बलिदान दिया, एवं अपनी माँ को धन्यवाद दिया, जिन्होंने उनकी पढ़ाई के लिए एक घरेलू सहायिका के रूप में काम किया क्योंकि उनके पिता की 7 से 8 हजार रुपये की मासिक आय का अधिकांश हिस्सा उनके कर्ज में चला गया। उन्होंने यह भी कहा कि कैसे उन्हें अपनी पढ़ाई के लिए पार्ट-टाइम काम करना पड़ा।

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