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कभी रोटी के लिए नही थे पैसे, नौकरी के लिए खाई दर-दर की ठोकरें.अब सालाना कमाते हैं 25 लाख रुपये

एक कहाबत है की 10 साल में तो कुड़ी के दिन भी बदल जाते हैं यानी अगर इन्सान मेहनती हो तो बुरे से बुरे दिन काटकर अच्छे दिन जरूर लाता है ऐसा ही कुछ कर दिखाया  नवादा जिले के डेरमा गांव के मनोज कुमार ने, इन्होने 2005 में BSC की और उसके बाद प्राइवेट नौकरी की लेकिन नौकरी जल्द ही चली गयी.

इसके बाद मनोज कुमार प्राइवेट कंपनियों के दर डॉ भटके नौकरी की मांग की लेकिन किसी भी कम्पनी में नौकरी नही मिली इससे मनोज अंदर ही अंदर टूट गए फिर मनोज ने इसी कमजोरी को अपनी मजबूती बनाने की ठान ली और मशरूम की खेती की.

700 रूपये की मशरूम की खेती 

जब मनोज के कही सफलता हाथ ना लगी तो इन्होने मात्र 700 रूपये से मशरूम की खेती की शुरुवात की जिसके बाद 2400 रुपये की कमाई हुई, हालाकिं मनोज को शुरू में खेती करने में परेशानी हुई लेकिन हिम्मत नही हारी

सोनल में ली थी ट्रेनिंग 

मनोज कुमार ने 2009-10 में DMR सोलन से प्रशिक्षण लिया, लेकिन तब तक मनोज मशरूम की खेती के साथ दूसरे कृषि कार्य में भी लगे रहे .

कभी  दर बदर भटकने वाले मनोज अपनी कंपनी 20 लोगों को सालो भर रोजगार दे रहे हैं. अपने जिले का मशरूम मैन बन गए और अब तक 5000 लोगों को प्रशिक्षण दिया हैमनोज हर साल 40 लाख से अधिक का कारोबार कर रहे हैं और 20 से 25 लाख की सालाना कमाई कर रहे हैं.

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