इंडियन क्रिकेट टीम के वर्तमान हैड कोच राहुल द्रविड़ विश्व क्रिकेट में एक बड़ा नाम है. इन्होने भी सालो तक दुनिया के हर क्रिकेट ग्राउंड पर खूब चौके-छक्को की बरसात की और दर्शको का खूब मनोरंजन कराया है. ढेर सारे शतक, अर्धशतक और रिकार्ड्स अपने नाम किये है. इसी के साथ इन्होने अपने सरल स्वभाव से कोरोड़ लोगो का दिल भी जीता है.

आपने भी राहुल द्रविड़ की जब भी मैदान पर या मैदान के बाहर देखा होगा तो एकदम शांत और सरल देखा होगा. वो अधिकतर गंभीर मुद्रा में ही देखे जाते है. लेकिन इस बारे में बहुत ही कम लोग जानते है की वो ऐसे क्यों है? वो इतने शांत क्यों है? इसी को लेकर राहुल द्रविड़ ने एक बड़ा खुलासा किया है. जिसमे उन्होंने खुद के ऐसे व्यवहार पर चर्चा की है. तो चलिए जानते है..

राहुल द्रविड़ ने भारत के सर्वप्रथम ओलम्पिक गोल्ड मेडलिस्ट अभिनव बिंद्रा को दिए अपने एक बयान में कहा की,

मैं कभी भी वीरेंद्र सहवाग की तरह नहीं बन सकता था, क्योकि मैं सहवाग जैसे व्यक्ति की तरह मैदान के अंदर और बाहर अपने व्यवहार को अपनी मानसिकता को तुरंत नहीं बदल सकता था. जब मैं नहीं खेल रहा होता था तब मैं अपनी बल्लेबाजी के बारे में सोचता था, लेकिन इसका कोई भी प्रभाव नहीं होता था. मेरी उर्जा का प्रबंधन और मेरी मानसिक उर्जा का अधिक हिस्सा मेरे कैरियर में लम्बी उम्र और प्रदर्शन में बदलाव लाने वाला था. 

जैसे जैसे मैं अपने कैरियर में आगे बढ़ा मुझे एहसास हुआ की मैं कभी भी ऐसा नहीं बन सकता हु की सहवाग की तरह जल्द स्कोर करू. या सचिन की तरह प्रदर्शन करू. तब मुझे धैर्य रखने की जरूरत थी. मुझे मेरे और गेंदबाज के बीच प्रतियोगिता पंसद थी और इससे मुझे काफी फायेदा मिला.

बता दे की राहुल द्रविड़ को टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम की दिवार के रूप में जाना जाता है. क्योकि इन्हें आउट करना किसी भी गेंदबाज के लिए आसान काम नहीं था, बता दे की इन्होने अपने कैरियर में 164 टेस्ट मैच, 344 वनडे मैच और 1 टी 20 मैच खेला है जिनमे इन्होने क्रमशः 13288 रन, 10899 और 31 रन बनाये है.

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