कहते है की क्रिकेट के खेल में टीम में अपनी जगह बनाना इतना मुश्किल नहीं होता जितना की टीम में खुद को लम्बे समय तक बनाये रखना होता है. इसके लिए खिलाडी को लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करना होता है. नहीं तो बहार का रास्ता दिखा दिया जाता है. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई खिलाडियों का कैरियर टीम में अंदर बाहर होने की वजह से बर्बाद हुआ है. लेकिन अब ये अंदर बाहर होने का सिलसला धाकड़ विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सेमसन के साथ काफी देखा जा रहा है.

जी हां, आपको मालूम हो की संजू सेमसन ने साल 2015 में ज़िम्बाब्वे दौरे पर ही टीम इण्डिया में अपना डेब्यू किया था. उसके बाद से अब 7 साल ही चुके है लेकिन संजू को पर्याप्त मौके नहीं मिले और अंदर बाहर होने के सिलसला चलता रहा. आप ये समझिये की संजू को इन 7 सालो में अभी तक 16 टी 20 और 7 वनडे मैचों में मौका मिला है.

इसी के चलते हाल ही में संजू सेमसन को इंग्लैंड दौरे पर भी मौका नहीं मिला था. इतना ही नहीं संजू को एशिया कप 2022 के लिए भी नहीं चुना गया है. बता दे की इसका कारण कुछ और नहीं बल्कि ऋषभ पन्त. पन्त इस समय टीम के स्थाई विकेटकीपर बल्लेबाज है. जब ऋषभ पन्त नहीं खेल रहे होते है तब संजू को मौका मिलता है. इसी के चलते अब अंदर बाहर होने को लेकर संजू सेमसन का दर्द छलका है. संजू सेमसन ने अपने बयाना में कहा है..

मेरा मानना है की आप कैरियर के किसी भी दौर से गुजर रहे हो आपको केवल पॉजिटिव सोच रखनी है. हालाँकि जब आओ अंदर बाहर होते हो बहुत सी बाते दिमागे में आती है. आपके दोस्त खेल रहे है लेकिन आप नहीं. ये चीजे काफी मुश्किल होती है. संजू कहते है की मैं हैरान हु जब भी मैं खेलता हु मुझे अच्छा सपोर्ट मिलता है.

संजू ने कहा की पहले मैं अपनी बैटिंग और खुद के बारे में सोचता था. लेकिन जब से आईपीएल में कप्तानी कर रहा हु मैं और भी बातो के बारे में सोचता हु.

संजू ने आगे ज़िम्बाब्वे दौरे पर फैंस के द्वारा मिले सपोर्ट को लेकर कहा की, मुझे लगता है की वहां मलियाली लोग काफी अधिक थे. चेटा चेटा  की आवाजे आ रही थी. ये सुनकर मुझे काफी ख़ुशी हुई और गर्व भी महसूस हुआ. बता दे की चेटा का मतलब बड़ा भाई होता है.

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