सोमनाथ मंदिर के बाण स्तंभ में छुपा है छठी शताब्दी का रहस्य, सदियों से है अनसुलझा

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पूरी दुनिया रहस्यों से भरी पड़ी है अभी तक कुछ रहस्यों से पर्दा उठा चूका है लेकिन अभी भी ऐसे कुछ रहस्य है जिनसे पर्दा उठाना बाकी है और ना ही अभी तक इन रहस्यों के बारे में जान पाया है. एक ऐसा ही रहस्य सोमनाथ मन्दिर में छुपा हुआ है जो कई सालों सदियों से अभी तक अनसुलझा है.

फोटो : Social media

सोमनाथ मन्दिर कब बना था और इसका निर्माण किसने कराया था इसके बारे में कोई नही जानता है लेकिन सोमनाथ मंदिर को इतिहास में कई बार तोडा गया और अंत में 1951 म इस मन्दिर का निर्माण हुआ कहा जाता है सोमनाथ मंदिर के प्रांगण में एक स्तंभ है, जिसे ‘बाण स्तंभ’ के नाम से जाना जाता है। इसी स्तंभ में वो रहस्य छुपा हुआ है, जो सबको हैरान कर देता है.

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इस मन्दिर के दक्षिण में समुद्र के किनारे ‘बाण स्तंभ’ बना हुआ है जो कई सदियों पुराना हैं. इस बाण स्तम्भ का जिक्र 6 वीं शताब्दी में किया गया है मतलब ये है कि उस समय भी यह स्तंभ वहां पर मौजूद था, तभी तो किताबों में इसका जिक्र किया गया है, लेकिन ये कोई नहीं जानता कि इसका निर्माण कब हुआ था, किसने कराया था और क्यों कराया था।

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कुछ विशेषज्ञ बताते हैं की ‘बाण स्तंभ’ दिशा बताता है.जिसके ऊपरी सिरे पर एक तीर (बाण) बनाया गया है, जिसका ‘मुंह’ समुद्र की ओर है। इस बाण स्तंभ पर लिखा है- ‘आसमुद्रांत दक्षिण ध्रुव, पर्यंत अबाधित ज्योर्तिमार्ग’। इ

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