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हाथ में बल्ला देखते ही घर वाले लगाते थे डांट, लोग देते थे ताने…लड़की है बाहर खेलने क्यों भेजते हो, अब बन गयी इंटरनेशनल खिलाड़ी

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आज हम भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार खिलाड़ी एकता सिंह बिष्ट के संघर्षों की कहानी शेयर करने जा रहे हैं। इसके लिए हमने एकता के इकलौते भाई विनीत सिंह बिष्ट से बात की।एकता सिंह बिष्ट  उत्तराखंड के अल्मोड़ा की रहने वाली हैं। उनके पिता कुंदन सिंह बिष्ट 1988 में आर्मी से हवलदार पद से रिटायर हुए थे। एकता दो बहनो व एक भाई में सबसे छोटी हैं। उनसे बड़ी बहन श्वेता बिष्ट एक कालेज में जॉब करती हैं।

आर्मी में थे पापा 

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एकता के भाई विनीत बताते हैं “पापा 1988 में रिटायर हुए थे। उस समय आर्मी में पेंशन मात्र 1500 रूपए महीने थी। उस पैसे को दोनों बहनो की शादी के लिए बचाकर रखा जाता था। घर का खर्च चलाने में मुश्किल होने लगी तो पापा ने घर से नजदीक ही एक चाय की दुकान खोल ली। जिसके बाद उसी से होने वाली कमाई से किसी तरह घर खर्च चलने लगा।”

5 साल की उम्र में खेल से प्यार 

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एकता जब 5 साल की थी तभी से उसका मन खेलने में ज्यादा लगता था। हमारे घर के सामने छोटा सा मैदान था। वहां अधिकतर लड़के ही क्रिकेट खेलते थे। वो भी उनके साथ खेलने लगी। कभी-कभी उसे लोग लड़की कहकर खेलने से मना कर देते थे। लेकिन वह इसके बावजूद वहीं डटी रहती थी।

लोग देते थे ताने 

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लड़कों के बीच वह इकलौती लड़की थी। कभी-कभी लोग ताने भी देते थे कि लड़की है दूसरे के घर जाना है। ऐसे में इसे क्रिकेट खेलने की छूट क्यों देते हो। लेकिन तब तक हमारा परिवार ये समझ चुका था कि एकता के अंदर कुछ तो असाधारण प्रतिभा है।

विनीत बताते हैं “ये बात साल 2000 की है। हमारे गांव के ही मैदान पर एक टूर्नामेंट हो रहा था। एकता भी अपने गांव की टीम से खेल रही थी। उसके बेहतरीन ऑलराउंड परफॉर्मेंस से हमारे गांव की टीम विनर बनी। घर की आर्थिक हालात बहुत अच्छी नहीं थी। इसलिए हम उसे कभी खेलने का कोई संसाधन नहीं दिला पाए।

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एकता ने अपने मेहनत और शानदार प्रदर्शन के दम पर देश की टीम में जगह बना ली। वह देश की टीम में जगह बनाने वाली उत्तराखण्ड की पहली क्रिकेटर थीं। देखते ही देखते वह इंटनेशनल स्टार बन गई। एकता दो साल पहले ICC की महिला टी-20 और वनडे टीम में जगह बनाने वाली इकलौती भारतीय बनी थीं।

विनीत ने बताया कि “एकता जबसे इंडियन टीम का हिस्सा बनी है, उसे समय बहुत कम मिलटा 3-4 महीने में एक बार ही घर आ पाती है। उसका डेली फोन रोज जरूर आता है। वह मेरी शादी में भी नहीं आ पाई थी। उस समय उसके IPL के मैच थे। लेकिन हम लोग इसी बात से खुश हैं कि आज उसने सिर्फ परिवार का ही नहीं बल्कि पूरे उत्तराखंड का नाम रोशन कर दिया है। ”

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