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किताबों के लिए नही थे पैसे, स्कूल में चपरासी की नौकरी करते थे पिता, घर के खर्चे के लिए माँ चलाती थी दुकान, बेटी विशाखा बन गयी IPS

आज के समय में कुछ बच्चे अपनी असफ़लत के पीछे हालातों की वजह बताते हैं लेकिन विशाखा भदाणे ने साबित कर दिया अगर कुछ करने का जज्बा हो तो हालात नही देखे जाते. विशाखा ने बहुत बुरे हालत में वो मुकाम हासिल किया जिसको पाने के लिए बच्चे VIP क्लास लेते हैं और AC में बैठकर तयारी करते हैं आज हम आपको 2018 बैच की IPS डॉ विशाखा भदाणे की कहानी बताने जा रहे हैं।

डॉ विशाखा भदाणे नासिक की रहने वाली हैं। उनके पिता अशोक भदाणे नासिक के उमराने गांव में एक छोटे से स्कूल में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी हैं। विशाखा दो बहनों व एक भाई में सबसे छोटी हैं।विशाखा के पिता अशोक चाहते थे कि उनके बच्चे पढ़ लिख कर बड़े आदमी बने। इसलिए वह शुरू से ही उनकी पढ़ाई पर काफी ध्यान देते थे। लेकिन उनकी कमाई इतनी नहीं थी कि घर खर्च के साथ वह बच्चों को अच्छे से सकें।

आमदनी कम होने के कारण विशाखा की मां ने भी स्कूल के बाहर एक छोटी सी दुकान खोल ली।  उनके पास किताबों आदि का काफी अभाव रहता था। पैसे न होने के कारण जब स्कूल की दो महीने की छुट्टियां रहती थी तब तीनों भाई बहन लाइब्रेरी में जाकर किताबें पढ़ते थे। उनकी मेहनत को देखते हुए स्कूल के अध्यापक भी उनका उत्साह बढ़ाते थे।

विशाखा जब 19 साल की थीं तो उस समय उनकी माता का निधन हो गया। घर को संभालने वाला कोई नहीं था। मां के मौत के बाद घर की भी जिम्मेदारी विशाखा पर आ गई। जिसके बाद वह घर के काम करने के बाद पढ़ाई करती थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद विशाखा UPSC की तैयारी में जुट गईं। दूसरे प्रयास में साल 2018 में उनका सिलेक्शन UPSC में हो गया। उन्हें IPS रैंक मिली।

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