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पापा में वर्दी पहनकर तिरंगे को सैल्यूट करना चाहती हूँ, लेकिन पापा नही चाहते थे बेटी पुलिस की नौकरी करे, .रो धोकर पापा को मनाया बन गई DSP

आज से कुछ समय पहले लडकियों को स्कूल नही बेह्जा जाता था लेकिन समय साथ लोगो की मानसिकता बदल गयी है अब धीरे धीरे लडकियां घर से निकलकर लड़को की बराबरी कर रही हैं. आज के समय में लड़कियां हर फिल्ड चाहे वो सरकारी नौकरी हो या कोई भी फिल्ड हो उसमे बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही हैं.

आज हम आपको एक लड़की की कहानी बताने जा रहे हैं, ये कहानी उस समय की हैं जब लडकियों को पढने नही दिया जाता था उसी समय छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव की लड़की ने डीएसपी बनने का सपना देखा वो बचपन से ही पुलिस की वर्दी को पहनने की सोचती थी। सिर पर पुलिस की कैप लगाकर तिरंगे को सैल्यूट करना चाहती थी। इसके लिए उसने मन लगाकर दिन रात पढाई की.

पढाई ऐसी की पुरे दीन पढ़ती रहती थी लेकिन 12 वीं के बाद उसको घर वालो ने पढाई करने के लिए मना कर दिया और पुलिस की नौकरी करने के लिए भी मना कर दिया था  तो घर में हल्ला बोल दिया, बाद में यही लड़की अधिकारी बनी. हम बात कर रहे हैं डीएसपी से IAS अफसर बनने वाली रानू साहू के बारे में।

रानू साहू 2005 के समय में अधिकारी बनी थी, उस समय ज्यादा पढ़े लिखे लोग नही हुआ करते थे डीएसपी बनी थीं तो उनके गांव में लोग हक्के-बक्के रह गए थे।मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में रानू बताती हैं कि उन्हें पुलिस की वर्दी बहुत आकर्षित करती थी। वो खुद को हमेशा पुलिस की वर्दी में देखतीं और सपने देखती थीं। उन्होंने ठान लिया कि वो डीएसपी बनेंगी।

12 वीं पास करने के बाद रानू ने आपने पापा को बताया की वो पुलिस लाइन में जाना चाहती है इसपर उनके पापा भड़क गए और पढाई करने के लिए साफ साफ मना कर दिया  उनके पिता एक मामली किसान थे वो नहीं चाहते थे कि बेटी पुलिस में जाए क्योंकि इसे एक सही क्षेत्र नहीं माना जाता था। पिता के मना करने पर रानू काफी रोई और अपने घर में पिता और परिवार के लोगों को समझाया। ऐसे में उनकी मां ने बिचौलिया बनकर बाप-बेटी की अनबन को कम किया

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