|

10 किमी पैदल चलकर जाते थे पढने, ट्रेन के फर्श पर बैठकर किया सफर, रहने के लिए सब्जी की गोदाम में में सोये, IPS बन गया लकड़हारे का ये बेटा

Advertisements

गरीबी इन्सना को क्या क्या नही करवाती है मजबूरी में बुरा वक्त काटने के लिए क्या क्या नही करना पड़ता है. आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स की स्टोरी सुनाने वाले हैं जिन्होंने इतने बुरे वक्त और हलात को काटकर जो मुकाम हासिल किया है वो जानकर हर कोई दंग रह गया है.

रॉबिन का जन्म अरुणाचल प्रदेश में चीन की सीमा से लगे एक गांव होंग में हुआ था। उनका जन्म आदिवासी समुदाय से हैं। उनके पिता खेती किसानी करते थे। घर के खर्च के लिए वह लकड़ी काट कर बाजार में बेंचने जाया करते थे।रॉबिन बचपन से ही पढ़ने में काफी होशियार थे। उनके गांव में उस समय कोई स्कूल नहीं था। इसलिए रॉबिन अपने घर से करीब 10 किमी पैदल चल कर स्कूल जाते थे।

Advertisements

लेकिन उनमे पढ़ने की लगन को देखते हुए उनका परिवार भी उनका पूरा सपोर्ट करता था।इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद रॉबिन ने दिल्ली का रुख किया रॉबिन ने दिल्ली आने के लिए ट्रेन पकड़ी। उस समय ट्रेन में सीट खाली नहीं थी। इसलिए ट्रेन में सफर कर रहे कुछ सुरक्षा बल के जवानो ने उन्हें शौचालय के पास फर्श पर बैठा दिया।

उन्हें हॉस्टल में भी कमरा नहीं मिल पाया तो रॉबिन ने JNU के पास ही स्थित एक सब्जी की गोदाम में रात बिताने का फैसला लिया। रॉबिन ने वहां कई रातें बिताईं। हांलाकि बाद में उन्हें जेएनयू के नर्मदा हॉस्टल में कमरा मिल गया।रॉबिन ने साल 1993 में पहली बार सिविल सर्विस का एग्जाम दिया। पहले ही अटेम्प्ट में उन्होंने सिविल सर्विस का एग्जाम क्रैक कर लिया। उन्हें IPS कैडर दिया गया।

Advertisements

IPS रॉबिन हिबु ने हेल्पिंग हैंड नाम की एक संस्था की भी शुरुआत की है, जो पूर्वोत्तर राज्यों से दिल्ली जैसे शहर में आने वाले युवाओं को मदद उपलब्ध कराती है।

Advertisements

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published.