विराट कोहली

जब बीमार पिता को लेकर दर-दर भटक रहे थे विराट कोहली, मदद के लिए कोई नहीं हुआ तैयार, डॉक्टर भी नहीं खोला था दरवाजा

विराट कोहली इस समय दुनिया के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज है और एकमात्र ऐसे खिलाड़ी है जिनकी औसत इंटरनेशनल क्रिकेट के तीनो फॉर्मेट में 50 से अधिक की है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि विराट किस अंदाज में बल्लेबाजी करते हैं। कोहली बहुत कम समय में अंतरराष्ट्री क्रिकेट के बड़े-बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किया है जिस वजह से उन्हें रन मशीन के नाम से भी जाना जाता है। इस समय विराट बहुत ही शानदार जिंदगी जी रहे हैं, लेकिन एक समय उनकी जिंदगी भी बहुत दर्दनाक रही थी।

अगर आप विराट कोहली के फैंस है तो आपको अच्छी तरह मालूम होगा कि जब विराट की आयु बहुत कम थी, उसी समय उनके पिता का निधन हो गया था। भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान अपने पिता को बचाने के लिए दर-दर भटक रहे थे, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। इन सभी बातों का खुलासा विराट ने खुद किया था।

जब विराट की जिंदगी रहा बहुत दर्दनाक

विराट कोहली एक इंटरव्यू के दौरान अपने बुरे पल को याद करते हुए बहुत सारी बातें कही थी। उस दौरान पत्रकार ग्राहम बेनसिंगर ने उनका इंटरव्यू लिया था। कोहली ने उस दौरान यह बताया था कि जब उनके पिता की मृत्यु हो गई, तब उनकी हालत कैसी थी। यह घटना विराट के लिए बहुत दर्दनाक रहा था, लेकिन उसी से उन्होंने सिख लेते हुए अपनी जिंदगी में आगे बढ़ा।

ब्रेन स्ट्रोक की वजह से कोहली के पिता का हुआ निधन

विराट कोहली के पिता प्रेम कोहली का निधन 9 दिसंबर 2006 को ब्रेन स्ट्रोक की वजह से हुआ था। उस समय विराट की आयु मात्र 18 वर्ष थी और दिल्ली में रणजी ट्रॉफी का एक मैच कर्नाटक के विरुद्ध खेल रहे थे। उस मुकाबले में दिल्ली को फॉलोऑन से बचाने के लिए विराट ने शानदार 90 रनों की पारी खेली थी। फिर वो अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे

जब डॉक्‍टरों ने नहीं खोला दरवाजा

विराट ने इंटरव्यू में कहा कि उन्होंने अपने पिता को अंतिम सांस लेते हुए अपने आँखों के सामने देखा था। जिस वजह से पिता की मौत कोहली की जिंदगी पर बहुत असर डाला। फिर कोहली ने अपने भाई से कहा कि वो देश के लिए खेलना चाहता है और उनके पिता की यही सोच भी थी।

कोहली ने कहा कि मैं रणजी का मुकाबला खेल रहा था और मुझे अगले दिन बल्लेबाजी करनी थी। लेकिन सुबह के समय तकरीबन ढाई बजे पिता का देहांत हो गया और मैं उन्हें अंतिम सांस लेते हुए देखा। उस समय हम आस-पास के डॉक्‍टरों के पास भी गए, लेकिन किसी ने दरवाजा तक नहीं खोला। फिर हम उन्हें हॉस्पिटल लेकर गए, लेकिन डॉक्‍टर उन्‍हें बचाने में सफल नहीं रहे। उसके बाद परिवार के सभी लोग पूरी तथ टूट गए और रोने लगे। लेकिन मेरी आँखों में आंसू नहीं आ रहे थे, क्योंकि मैं पूरी तरह सन्‍न था।

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