क्रिकेट का टी 20 फोर्मेट हो या वनडे हो या फिर टेस्ट मैच सामने आने वाली हर गेंद को बाउंड्री पार भेजने के काम जिस खिलाड़ी का था उसका नाम वीरेंद्र सहवाग है। वीरेंद्र सहवाग भारतीय क्रिकेट के वो खिलाड़ी हुए है जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट को भी वनडे या फिर टी 20 मैच की तरह खेला और लगभग हर गेंद को बाउंड्री पार भेजा। इसी वजह से आज भी लाखो लोग वीरेंद्र सहवाग की बल्लेबाजी के दीवाने है।

सहवाग ने अपने शानदार खेल के दम पर ढेरो रिकॉर्ड कायम किये कई ऐतिहासिक पारियाँ खेली जिनका रिकॉर्ड आज तक भी कोई बल्लेबाज नहीं तोड़ पाया। लेकिन वो कहते है ना की हर इंसान के जीवन में मुश्किल दौर आता है। तब वो हडबडाहट में कुछ ऐसा कर जाता है जिसका नुकसान जिंदगीभर भुगतना पड़ता है। लेकिन यदि ऐसी स्थति में वो शांत दिमाग से काम ले या फिर कोई उसे सही सलाह देने वाला हो तो ये संकट के बादल कुछ ही समय में दूर हो जाते है।

ऐसा ही कुछ कहानी वीरेंद्र सहवाग के साथ साल 2008 में तब हुई थी, जब महेंद्र सिंह धोनी टीम इंडिया के कप्तान थे और सहवाग आउट ऑफ फॉर्म चल रहे थे। तब सचिन तेंदुलकर ने उनका साथ दिया था। इसका खुलासा खुद सहवाग ने हाल ही में अपने एक इंटरव्यू में किया।

सहवाग ने बताया की जब साल 2008 में हम ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थे तब मैं कुछ मैचो में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया था। जिसके बाद धोनी ने मुझे प्लेइंग 11 से ड्राप कर दिया था। तब मैं वनडे क्रिकेट से संन्यास लेने पर विचार करने लगा और सोचा की अब केवल टेस्ट ही खेलूँगा। हालंकि उसी समय 150 के आसपास रन बनाने के बाद मैंने वापसी की थी। तब तेंदुलकर ने मुझे रोका था।

तब सचिन ने मुझे कहा था की यह कैरियर का बुरा वक्त है। तुम अभी रुको घर जाओ और आराम से सोचो। इसके बाद मेरे मन से संन्यास लेने का विचार हट गया था। और फिर मैंने आगे भी क्रिकेट खेला।

बता दे की इस दौरान सहवाग ने ट्राई सीरीज के चार मैचो में 6, 33, 11 और 14 रन ही बनाये थे। जिसके बाद धोनी ने सहवाग को ड्राप करने का फैलसा लिया था।

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